ये कैसा मौसम है ?


आज लगभग पुरी दुनिया एक ऐसे Monsoon मे डूबी हूई है जिसमे वो हर पल, हर समय भीगती रहती है और ये Monsoon है Terrorism Monsoon. Terrorism Monsoon कहने का मतलब ये एक ऐसे मौसम की तरह है जो कभी आया था छोटे रुप मे, आज मौजुद है बडे रुप मे और शायद कल भी मौजुद रहेगा इससे भी बडे रुप मे. आमतौर पर तो हर मौसम की एक समय सीमा होती है जो आता है और चला जाता है पर ये अब तक गया नही है और अबतक इस विश्व के कई बडे भागो मे इसकी हवाये बह रही है जो अपने साथ कुछ भी उडाये ले जा रही है और छोड जा रही है एक ऐसा मलबा जिन्हे साफ करते करते कुछ खुद गंदे हो जाते है और उस मलबे पे एक ऐसी राजनीति शुरु होती है जो इस Monsoon की तरह खत्म नही होती और जब तक खत्म होती है तबतक दुसरे मलबे का ढेर खुद पे होने वाली राजनीति का इंतजार कर रहा होता है.
एक असंतोष की भावना से उपजा ये Terrorism कुछ नही देखता . चलती Train उडती Plain और जमीन पे खडी Building , कौन इनके निशाने पे कब आ जाये कोई कुछ कह नही सकता . बेशक हमारी सरकार इनपे लगाम करती है पर लगाम फिर छुट जाता है और कोई नया बुरा परिणाम सामने मुंह बाये खडा होता है. इनका नेटवर्क इतना फैल चुका है की हर जगह मौजुद है कोई न कोई रुप मे.
ये आखिर कैसा मौसम है जो जाने का नाम ही नही ले रहा है और जिसे हटाने के तमाम उपाय नाकाम नजर आ रही है.ये कैसा मौसम है जो अनगीनत जिंद्गियो को चपेट मे लिये जा रहा है किसी के आंसु किसी के दर्द से इसे कोई मतलब नही है. धर्म , जिहाद और असंतोष के नाम पर ये एक ऐसे युग पे तुला हुआ है जिसकि कल्पना शायद इश्वर ने भी नही की होगी होगी.
सोच बदलने से वाकई इंसान बदल जाता है ,तो अगर ढंग की सोच उनके भी अंदर आ जाये जो ऐसी हवाओ के जिम्मेदार है, जो ऐसे खुन के बादल बरसाते है जिनमे कुछ समुदाय भिगते है तो कुछ की बारी बाद मे आती है तो ये मौसम बदल सकते है फुलो के बारिश मे...... लेकिन ऐसी सोच आयगी कब ?
आज भारत , अमेरिका जैसे कई देश Terrorism के निशाने पे है और पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईराक जैसे कई देश इसकी चपेट मे पुरी तरह से आ चुके है. आय दिन इन देशो मे कुछ न कुछ ऐसा होता रहता है जो आतंकवाद का परिणाम होता है......जो हर वर्ग को कुछ न कुछ दर्द जरुर दे देता है तो जरुरत है अकेले नही मिल के लडने की , सभी को एक साथ , इस Terrorism के खिलाफ . इसे जड से उखाड फ़ेंकने की संकल्प लेने भर से कुछ नही होने वाला......कुछ करने से कुछ होगा और वो कुछ जरुर करना होगा हर किसी को, देश की सरकार को, देश की जनता को किसी न किसी तरिके से और जायज तरिके से......क्योकि

"ये वो मौसम है, जो भींगो देता है,
तन बदन को,
काले रक्त से,
ये वो मौसम है, जिन्हे डर नही,
भय नही,
किसी भी तख्त से,
बस इरादे हो मजबुत हमारे,
कदम उठे खिलाफ इनके सारे,
तो खत्म हो जायेंगे ये,
पहले ही वक्त से"

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