कोरोना, चैप्टर-1
चैप्टर 1
【Reality】
इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका महाशक्ति हैं और चीन आने वाले वक्त में ये पद हथियाना चाहता हैं तो उसकी नजर हमेशा 360 डिग्री घूमती रहती हैं।
पश्चिमी देशों में क्रिसमस की छुट्टियां खत्म होने को हैं। पूरा वर्ल्ड नए वर्ष के आगमन की तैयारियों में जुटा हुआ हैं और इधर चीन के हुबेई प्रांत के बुहान शहर के एक हॉस्पिटल में पहला केश रजिस्टर होता हैं दिसंबर 31 को, पीड़ित इसे हल्के में लेता हैं, अगले कुछ दिनों में डॉक्टर्स इसे वायरल फीवर बताते है और नाम देते हैं, "कोरोना"।
चीन , वर्ल्ड की सबसे बड़ी आबादी वाला देश, एक कम्युनिस्ट देश, एक विकसित देश और अपनी संस्कृतियों का पालन करने वाला एक अनूठा देश। एक ऐसा देश जो विश्व शक्ति बने की चाहत रखता हैं और उसके लिए कुछ भी कर गुजरने की चाहत रखता हैं तो क्या कोरोना कुछ ऐसा ही कदम हैं ?
वुहान के सी फ़ूड मार्केट से कई सारे मरीजो की संख्या बढ़ती जाती है। जनवरी 22 और 23 को मरीजो में रिकवरी भी होती हैं पर तबतक वायरस कोरोना अपने मोडरेट स्टेज से बाहर निकल चुका होता हैं और अगले दिन (24 जनवरी) से मौत का तांडव शुरू होता हैं। 2 फरवरी तक सैकड़ो लाशों के ढ़ेर लग जाते हैं। सवाल खडे होने लगते हैं सरकार पे। सरकार थोड़ी गंभीर होती हैं पर उसे या तो इसके कहर का अहशास नहीं होता हैं या वो सबकुछ जानते हुए थोड़ा इंतजार करने लगती हैं।
डॉक्टर ली वेनलियांग जिसने दिसंबर में ही चेतावनी दी थी कोरोना की, उनकी फरवरी सेकंड वीक में डेथ हो जाती हैं। उन्होंने ये कहा था कि दिसंबर में वुहान सी फ़ूड मार्केट से आये छह मरीजों में सार्स जैसे लक्षण हैं। सार्स वही बीमारी हैं जिसकी वजह से चीन और पूरी दुनिया मे 2003 में 800 लोगों की मौत हुई थी। इस बीमारी ने 8000 लोगो को प्रभावित किया था और चीन ने इस बात को काफी छुपाने की कोशिश की थी। WHO को गलत रिपोर्ट पेश किया था। WHO को दिए रिपोर्ट में सार्स से मारने वालों की संख्या 350 के आस पास बताई गई थी।
वायरस दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ते जाता हैं। इस वायरस को मामूलीे सा समझ रहे डॉक्टर्स के पास इसका कोई इलाज नही होता हैं। अगले कुछ दिनों में स्थिति ये बनती है कि चीन दस दिनों में एक हॉस्पिटल खड़ा कर देता है और पूरे देश मे लॉकडाउन कर देता हैं। सारे बॉर्डर को सील कर देता हैं। एयरपोर्ट बंद कर देता हैं पर 23 फरवरी आते आते 2366 लोग मौत के मुंह मे चले जा चुके होते हैं और एफक्टेड लोगो का ग्राफ बड़ी ही तेजी से बढ़ रहा होता हैं। चीन अभी भी वर्ल्ड से बहुत कुछ छुपा रहा होता हैं। चीन से ही ऐसी बाते उठती हैं कि ये कोरोना वायरस एक केमिकल वेपन हैं जो या तो लैब से दुर्भाग्य से आउट हो गया या यह एक तरह का परीक्षण हैं जो कितनी तबाही मचाएगा ये देखने के लिए हैं। इसी बीच फरवरी खत्म होते होते मौत का आंकड़ा 3000 के करीब पहुंच जाता हैं। संक्रमित लोगो की संख्या एक लाख के पार पहुंच जाती हैं। मार्च फर्स्ट वीक में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प इसे चाइनीज वायरस कह देते हैं और चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अमेरिका पे ये आरोप लगाते हैं कि अमेरिकी फौज अक्टूबर में बुहान क्षेत्र में आई थी और उनके मिलिट्री जर्म वारफेयर प्रोग्राम के जरिए इस वायरस का उनके क्षेत्र में फैलना शुरू हुआ। हालांकि सबूत ना चीन के पास हैं ना ही अमेरिका के पास। आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू होता हैं। चीन वैश्विक लीडर बनने की कोशिश में है जबकि अमरीका 'दुनिया के दरोगा' की हैसियत को गंवाता दिख रहा है। मार्च 15 तक मारने वालों की संख्या 3199 तक पहुंचती हैं। ग्राफ ये बताता हैं कि संख्या घट रही हैं। चीन के दूसरे शहरों में संख्या पर काबू नही पाया जा सका हैं और मार्च 20 के बाद चीन में मौत पर काबू पा लिया जाता हैं ऐसा वहां की गवर्नमेंट कहती हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार मरने वाला की संख्या 3268 होती हैं।
【Real Reality】
◆चीनी मीडिया के अनुसार ये कोरोना वायरस जानवरों जैसे चमगादड़ और पैंगोलिन के जरिये इंसान में फैली। चीन में प्रेस और सूचना पर सरकार का ही अधिकार होता हैं तो ये बात सरकार की ही हैं पर कई सारे ऐसे सोर्सेज जो चीन के तरफ से ही हैं उसकी इस बात को झुठला दे रहे हैं। बार बार जैविक हथियार की ही बात सामने आ रही हैं।
◆न्यूयॉर्क में रहने वाले चीनी ब्लॉगर जेनिफर जेंग 19 मार्च को जारी चीनी मासिक डेटा को फेसबुक पर पोस्ट करते हैं। इस डाटा के अनुसार सेलफोन यूजर की संख्या 1.60 अरब से घट कर 1.58 अरब रह जाती हैं और लैंडलाइन यूजर का आंकड़ा 19.83 से घटकर 18.99 रह जाता हैं। जेंग ने इशारों में ये कहा कि ये एकाउंट कोरोना वायरस के कारण हुई मौतों की वेवजह से बंद हो सकते हैं। मोबाइल कंपनियों की माने तो जनवरी तक इनके ग्राहकों की संख्या में लागातार बढ़ोतरी आ रही थी पर जनवरी से मार्च तक अचानक 1.50 करोड़ से ज्यादा एक्टिव ग्राहक गुम हो गए।
◆बुहान शहर जो कभी रंगीन लाईटों से जगमगाता रहता था, ऊंची ऊंची बिल्डिंग में हमेशा चहल पहल बनी रहती थी, वहां अधिकांश अपार्टमेंट खाली नजर आ रहे हैं। रातो को घुप अंधेरा के शिवा कुछ नही दिख रहा हैं जबकि बिजली की आपूर्ति कभी रुक नही रही हैं।
◆इस वायरस की वजह से वर्ल्ड मार्केट बुरे तरह से प्रभावित हुआ हैं और ऐसा संभव हैं कि चीन के पास इस वायरस का एन्टीटोड पहले से मौजूद हो।
◆वर्ल्ड लेवल पर जो तबाही आई हैं, उसमे चीन उबरने में मदद करे और विश्वशक्ति का पोस्ट हाशिल करें और हो सकता हैं उसने पहले से ही सब प्लान किया हो।
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कोरोना सिर्फ चीन तक ही सीमित नहीं हैं। पूरा का पूरा वर्ल्ड कैसे प्रभावित हैं, मौते रुक नहीं रही हैं। कोरोना का सबसे बड़ा कहर तो अभी बाकी हैं- पढ़े चैप्टर 2 में।
my report@कोरोना
Shashi Ranjan✍

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