मोहब्ब्ते-ए-जाम !
होश खोने को, दुनिया बेहोश होती
है,
होठो पे जाम चढाय
मदहोश होती हैं !
मोहब्बत जाम से बढकर, कोई दुजा नहीं होता,
खुदा नाराज हो लेकिन, बढकर इससे पुजा
नहीं होता !
कसम जाम-ए-मोहब्बत
की, ये रग रग मे चलती है,
होठो से चढती है और
आंखो मे बसती हैं !
हर रोज शिकायत का, मौका नही देना,
वक्त मिले तो हि, बस थोडा पी लेना !
हलक मे जाते हि ये
जाम, दिल को ठंठक देती हैं,
जुबाँ को बोल देती
हैं, महफिल को रौनक देती हैं !
वादा आखीरी तुझसे, ऐ जाम करते हैं,
अब संग तेरे जीना, ये ऐलान करते हैं !
तो जाम सबेरे-शाम, अब शाम-सबरे जाम,
देखुँ - छुँलु -
पालूँ, एक तेरा हि तो नाम......!

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