“हर अफजल गोली खायगा, जब जब वो सर उठायगा !”
jnu campus की हालिया ताजा गतिविधिया क्या इसी बात का संकेत देती है कि स्वतंत्रता का मतलब यही है कि हम देश के ही खिलाफ हो जाये , उसे तोडने की बात करने लगे , विद्रोही नारे लगाने लगे। एक बढिया शिक्षा , बढिया शि क्षक और बढिया शैक्षणिक माहौल से नई विचारधारा का जन्म होता है , लेकिम ये कैसी विचारधारा हैं जो एक ऐसा माहुल बनाने में लगी हैं जहां हाशिल कुछ नहीं होने वाला और हाशिल हुआ भी तो वो एक अंधकार के अलावा कुछ भी नहीं होगा । अफजल जैसो को शहीद बताना किस तरह की मानसिकता से परिचय कराती है..........क्या ये मीडिया के कैमरो के चमक धमक के सामने आने की बेताबी है या बेवजह माहौल खराब करने की। अफजल की बात करे तो संसद हमले मे शहिद को क्यो भुल रहे है वे........क्या उनके नाम तक पता हैं उनको , उनका क्या हुआ , उनके परिजन किस हाल मे हैं आज..... क्या वे आतंकि थे अगर अफजल शहिद है तो? संसद पर हमले के दौरान शहीद दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट सब−इंस्पेक्टर नानक चंद का परिवार क्या सोच रहा होगा कि नानक कि कुर्बानी मजाक बन गई। शहीद हेड कॉन्सटेबल चौधरी विजेंद्र सिंह के परिजनों की आँखों मे ह...