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कोरोना-थोड़ी बातें

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पूरी दुनिया में तबाही मचाते हुए इस वायरस ने इंसानों को भयभीत कर रखा हैं। इंसान अपनी हद में हैं। तो पढ़ते हैं इंसानों को उनके हद में लाने वाले इस वायरस के बारे में।  कोरोनावायरस कई प्रकार के विषाणुओं का एक ऐसा समूह है जो इंसानों और जानवरों में रोग उत्पन्न करता है। यह आरएनए वायरस होते हैं जो मानवों में श्वास तंत्र के द्वारा संक्रमण पैदा करता है जिसकी गहनता हल्की (जैसे सर्दी-जुकाम) से लेकर अति गम्भीर (जैसे, मृत्यु) तक हो सकती है। जानवरो जैसे गाय और सूअर में इनके कारण अतिसार हो सकता है जबकि इनके कारण मुर्गियों में ऊपरी श्वास तंत्र के रोग उत्पन्न हो सकते हैं। इसके रोकथाम के लिए कोई टीका (वैक्सीन) अभी तक उपलब्ध नहीं है और  इसका उपचार प्राणी के प्रतिरक्षा प्रणाली पर निर्भर करता है। अभी तक दिख रहे  रोगलक्षणों (जैसे कि निर्जलीकरण या डीहाइड्रेशन, ज्वर, आदि) का उपचार किया जा रहा है ताकि संक्रमण से लड़ते हुए शरीर की शक्ति बनी रहे। चीन के वूहान शहर से 2019 में उत्पन्न होने वाला नोवेल कोरोना वायरस इसी समूह के वायरसों का एक उदहारण है।  WHO ने इसका नाम COVID-19 रखा हैं। च...

हमने सुना था एक हैं भारत !

कोरोना, चैप्टर-2

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चैप्टर-2 【Reality】 जनवरी लास्ट, चीन में मौत का सिलसिला थम नही रहा हैं पर नाही चीनी सरकार इसे गंभीर ले नही रही हैं नाही दूसरे देशों को सतर्क कर रही हैं और नाही WHO को सही रिपोर्ट दे रही हैं। हालांकि चीन ने 31 दिसम्बर को ही WHO को कोरोना के बारे में अपडेट किया जरूर पर सीरियस तरिके से नहीं। अब कोरोना फैलना शुरू होता हैं बाहर के देशों में। इटली के रोम में पहला कन्फर्म केश मिलता है 31 जनवरी को जो चीनी कपल है और जो 28 जनवरी को मिलान एयरपोर्ट के रास्ते रोम पहुँचा हैं। अगली दोपहरी को उन्हें सर्दी खाँसी होती हैं फिर शाम को ये भर्ती होते हैं लज़्ज़ारो सपल्लनज़नी नेशनल इंस्टीट्यूट फ़ॉर इन्फेक्शस डीसीसेस में, जहाँ उनमे कोरोना की पुष्टि होती हैं 31 जनवरी को। सिर्फ उसी एक केश पर इटैलियन गवर्नमेंट नेशनल इमरजेंसी घोषित कर देती हैं छः महीनों के लिए। इधर चाईना के बाहर पहली मौत होती हैं फिलिपिंश में जो एक 44 वर्षीय चीनी नागरिक हैं और जो 12 जनवरी को हॉन्ग कॉन्ग से फिलिपिंश आया हुआ हैं। फरवरी छः को एक और इटैलियन नागरिक कोरोना पॉजिटिव पाया जाता है और 21 फ़रवरी को 16 कन्फर्म केश पाए जाते हैं तथा उसके अगले...

कोरोना, चैप्टर-1

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  चैप्टर 1 【Reality】 इसमें कोई शक नहीं कि अमेरिका महाशक्ति हैं और चीन आने वाले वक्त में ये पद हथियाना चाहता हैं तो उसकी नजर हमेशा 360 डिग्री घूमती रहती हैं। पश्चिमी देशों में क्रिसमस की छुट्टियां खत्म होने को हैं। पूरा वर्ल्ड नए वर्ष के आगमन की तैयारियों में जुटा हुआ हैं और इधर चीन के हुबेई प्रांत के बुहान शहर के एक हॉस्पिटल में पहला केश रजिस्टर होता हैं दिसंबर 31 को, पीड़ित इसे हल्के में लेता हैं, अगले कुछ दिनों में डॉक्टर्स इसे वायरल फीवर बताते है और नाम देते हैं, " कोरोना "।  चीन , वर्ल्ड की सबसे बड़ी आबादी वाला देश, एक कम्युनिस्ट देश, एक विकसित देश और अपनी संस्कृतियों का पालन करने वाला एक अनूठा देश। एक ऐसा देश जो विश्व शक्ति बने की चाहत रखता हैं और उसके लिए कुछ भी कर गुजरने की चाहत रखता हैं तो क्या कोरोना कुछ ऐसा ही कदम हैं ? वुहान के सी फ़ूड मार्केट से कई सारे मरीजो की संख्या बढ़ती जाती है। जनवरी 22 और 23 को मरीजो में रिकवरी भी होती हैं पर तबतक वायरस कोरोना अपने मोडरेट स्टेज से बाहर निकल चुका होता हैं और अगले दिन (24 जनवरी) से मौत का तांडव शुरू होता हैं। 2 फरवर...

“हर अफजल गोली खायगा, जब जब वो सर उठायगा !”

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jnu campus की हालिया ताजा गतिविधिया क्या इसी बात का संकेत देती है कि स्वतंत्रता का मतलब यही है कि हम देश के ही खिलाफ हो जाये , उसे तोडने की बात करने लगे ,  विद्रोही नारे लगाने लगे। एक बढिया शिक्षा , बढिया शि क्षक और बढिया शैक्षणिक माहौल से नई विचारधारा का जन्म होता है , लेकिम ये कैसी विचारधारा हैं जो एक ऐसा माहुल बनाने में लगी हैं जहां हाशिल कुछ नहीं होने वाला और हाशिल हुआ भी तो वो एक अंधकार के अलावा कुछ भी नहीं होगा ।  अफजल जैसो को शहीद बताना किस तरह की मानसिकता से परिचय कराती है..........क्या ये मीडिया के कैमरो के चमक धमक के सामने आने की बेताबी है या बेवजह माहौल खराब करने की। अफजल की बात करे तो संसद हमले मे शहिद को क्यो भुल रहे है वे........क्या उनके नाम तक पता हैं उनको , उनका क्या हुआ , उनके परिजन किस हाल मे हैं आज..... क्या वे आतंकि थे अगर अफजल शहिद है तो? संसद पर हमले के दौरान शहीद दिल्ली पुलिस के असिस्टेंट सब−इंस्पेक्टर नानक चंद का परिवार क्या सोच रहा होगा कि नानक कि कुर्बानी मजाक बन गई। शहीद हेड कॉन्सटेबल चौधरी विजेंद्र सिंह के परिजनों की आँखों मे ह...

आरक्षण, एक बीमारी या एक ईलाज !

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आरक्षण , एक बीमारी या एक ईलाज. बीमारी उनके लिये जो इसकी वजह से खुद को साबीत करने मे सक्षम नही हो पा रहे है और ईलाज उनके लिये जो इसकी वजह से खूद की बिमार काया को बडी जल्दी से स्वस्थ कर पा रहे हैं. कुल मिलाकर कहे तो कुछ समूदाय के लिय ये(आरक्षण) एक ऐसे सावन की तरह है जिसमे वे हमेशा भींगना चाहते हैं और उनकी चाह ये भी है कि ये बरसात कभी खत्म ना हो बल्कि और बढे और इसकी बरसात में उनके आने वाले सारे वंश साराबोर हो. पर उनके दर्द को कौन समझ पा रहा है जो इसकी मार झेल रहे है , शायद कोई नही या शायद वे जो खुद इस दर्द से पीडीत हैं. एक तरफ जहाँ आरक्षण हैं वहाँ वे सिर्फ उतनी हि मेहनत करते है जीतने से वे उस आरक्षीत श्रेणी में आ सके और ठिक उसी चीज के लिये उन लोगो मे से बहूतो के मेहनत का कोई कोई फल नही निकल पाता जो इस अमृत रुपी आरक्षण से वंचीत है जबकी अगर कमपेरीजन किया जाय तो वे उस आरक्षीत श्रेणी में काफी ऊपर आ सकते हैं ! यहाँ उनके दर्द को कोई समझ नही पा रहा है , और ये दर्द बहूत ही ज्यादा होता जा रहा हैं और इसी दर्द से उबरने के लिये बेकहैं नतीते का इक उदाहरण है , हार्दिक पटेल का आंदोलन. बेशक उ...

ये कैसा मौसम है ?

आज लगभग पुरी दुनिया एक ऐसे Monsoon मे डूबी हूई है जिसमे वो हर पल , हर समय भीगती रहती है और ये Monsoon है Terrorism Monsoon. Terrorism Monsoon कहने का मतलब ये एक ऐसे मौसम की तरह है जो कभी आया था छोटे रुप मे , आज मौजुद है बडे रुप मे और शायद कल भी मौजुद रहेगा इससे भी बडे रुप मे. आमतौर पर तो हर मौसम की एक समय सीमा होती है जो आता है और चला जाता है पर ये अब तक गया नही है और अबतक इस विश्व के कई बडे भागो मे इसकी हवाये बह रही है जो अपने साथ कुछ भी उडाये ले जा रही है और छोड जा रही है एक ऐसा मलबा जिन्हे साफ करते करते कुछ खुद गंदे हो जाते है और उस मलबे पे एक ऐसी राजनीति शुरु होती है जो इस Monsoon की तरह खत्म नही होती और जब तक खत्म होती है तबतक दुसरे मलबे का ढेर खुद पे होने वाली राजनीति का इंतजार कर रहा होता है. एक असंतोष की भावना से उपजा ये Terrorism कुछ नही देखता . चलती Train उडती Plain और जमीन पे खडी Building , कौन इनके निशाने पे कब आ जाये कोई कुछ कह नही सकता . बेशक हमारी सरकार इनपे लगाम करती है पर लगाम फिर छुट जाता है और कोई नया बुरा परिणाम सामने मुंह बाये खडा होता है. इनका नेट...