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मोहब्ब्ते-ए-जाम !

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होश खोने को , दुनिया बेहोश होती है , होठो पे जाम चढाय मदहोश होती हैं ! मोहब्बत जाम से बढकर , कोई दुजा नहीं होता , खुदा नाराज हो लेकिन , बढकर इससे पुजा नहीं होता ! कसम जाम-ए-मोहब्बत की , ये रग रग मे चलती है , होठो से चढती है और आंखो मे बसती हैं ! हर रोज शिकायत का , मौका नही देना , वक्त मिले तो हि , बस थोडा पी लेना ! हलक मे जाते हि ये जाम , दिल को ठंठक देती हैं , जुबाँ को बोल देती हैं , महफिल को रौनक देती हैं ! वादा आखीरी तुझसे , ऐ जाम करते हैं , अब संग तेरे जीना , ये ऐलान करते हैं ! तो जाम सबेरे-शाम , अब शाम-सबरे जाम , देखुँ - छुँलु - पालूँ , एक तेरा हि तो नाम......!

राज छुपा है आंखो मे !

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राज छु पा है आंखो में आंखे ही बतलायेंगी पर आंखो का भी क्या भरोसा खूली या बंद रह जायंगी जीवन बस एक राज है इसे मिटा नहीं सकते हम आंख आईना है जीवन का तस्वीर छुपा नही सकते हम प्यार मोहब्बत की बांते आंखो का ही खेल हैं आंख ईशारो से ही   सब राज उगलते जायेंगी हँशी-खुशी दूनिया की आंखे ही बतलाती हैं दर्द दिलो के जाहिर करने बुंदो को छलकाती हैं आंखो से ही देख ख्वाब दर्द शांत हो जाता हैं आंख मुसाफिर है जीवन की संग हमारे जांयगी क्या कहूँ इन आंखो को ये लब्ज हमारे मन की हैं मन को मन से भीतर ही बस आंखे देख पायंगी